आवरण कथा

हमारा अतुल्य भारत !

‘ भारतीय विचारधारा भारतीय परंपरा में परिव्राजक का स्थान प्राचीन काल से ही है। संन्यासी को किसी स्थान विशेष से मोह न हो, इसलिए परिव्राजक के रूप में पर्यटन करते रहना होता है। ज्ञान के विस्तार के लिए अनेक यात्राएँ की जाती थीं। आदि शंकर की प्रसिद्ध भारत यात्राएँ इसी उद्देश्य से हुई ।
देश के संरक्षित जंगलों में भारत के 75 राष्ट्रीय उद्यान और 421 अभयारण्य सम्मिलित हैं, जिनमें से बाघ परियोजना के दायरे में 19 आते हैं। इसकी जलवायु और भौगोलिक विविधता इसे 350 से अधिक स्तनपायी और 1200 पक्षी प्रजातियों का घर बनाती है, जिनमें से कई उपमहाद्वीप में अद्वितीय हैं। ’’

हमारा अतुल्य भारत !

भारत प्राचीन से ही समृ़द्ध संस्कृति एवं विरासत का देश रहा है यहाँ अनेकता में एकता देखने को मिलता है। यहाँ की प्रकृति सदैव मन को लुभाती है मन को आनंदित करती यहाँ का मनमोहक क्षेत्र जहाँ भगवान राम, भगवान कृष्ण, महात्मा बुद्ध, भगवान महावीर का जन्म हुआ, वह क्षेत्र सदा से ही रमणीय रहा है। यह पर्यटन के लिए उत्तम स्थान माना जाता है। यहाँ आने के बाद पर्यटक स्वयं को अधिक प्रफुल्लित अनुभव करते हैं। जो भी यहाँ पर्यटन के लिए आता है वह इसकी सुंदरता देखकर यहीं का होकर रह जाता है। इतिहास गवाह है कि यहाँ भगवान भी विहार के लिए स्वर्ग से आते थे और यहाँ की प्रकृतिक सौन्दर्य के प्रति आकर्षित हो जाते थे किन्तु अब ऐसा नही है लोग अब आध्यात्मिक पर्यटन के नाम पर लोग पर्यटन स्थल जाते हैं और वहाँ पिकनीक एवं छुट्टीयाँ मनाते हैं।
पर्यटन के क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन एक नवीन आस्था है भारत ने सदा से ही 'अतिथी देवो भव:' के संस्कारों का परिपोषण किया है। आध्यात्मिक पर्यटन स्थल से तात्पर्य किसी धर्म या धार्मिक व्यक्ति से संबंधित स्थल नही होता बल्कि ऐसा स्थल जहाँ व्यक्ति अपने आंतरिक चेतना के विकास प्राप्ति करता है और इसका अनुसरण करने वालो को किसी विशेष धर्म के संबधित होना आवश्यक नहीं है। इस दृष्टि से भारत भूमि पर अनेक ऐसे पर्यटन स्थल है जहाँ कुछ समय गुजारने पर व्यक्ति को चेतना का परिष्कार होने लगता है और उसमें लोक कल्याण का भाव तंरगित होने लगता ह ऐसी भाव तंरगों का मानस पटल पर प्रविष्ट होने का रहस्य यह है कि उसक्षेत्र में वर्तमान अथवा पहले कभी सिद्ध व्यक्तियों, ऋषियों अथवा मुनियों द्वारा की गई तप साधना एंव लोकमंगल हेतु छोड़ी गई घनीभूत भाव तरंगें। आध्यात्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा पर्यटन स्थल हिमालय क्षेत्र माना जा सकता है।
जहाँ अनेक ऋषियों ने सैकड़ो वर्ष तक साधना की उन्होने स्वयं के दुर्गुणों को हटा कर अपनी चेतना को गंगा जल जैसा निर्मल बना दिया था। उत्तराखंड में चार धाम, पांच केदार, शक्तिपीठ आदि क्षेत्र भी आध्यात्मिक पर्यटन के स्थान है।


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