अनुक्रमणिका
पृष्ठ क्र. 6
ये गुरुदेव का प्रताप था प्रत्यवायो न विद्यते, ये गुरुदेव का प्रताप था कि अभिक्रम सबके लिए सुगम हो गया। योग का अभिक्रम सबके लिए सुगम हो गया और जब लाखों-लाखों आदमी सारे विश्व में भावातीत होने लगे और फिर हजारों- हजारों आदमी जब भावातीत चेतना में स्पन्दन देने की योग्यता पाने लगे, स्पन्दन देने लगे, सिद्धियों का अनुभव होने लगा।...
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पृष्ठ क्र. 8
सरकार द्वारा किए जा रहे तकनीकी कौशल विकास के प्रयासों को एडवांस करना होगा। साथ ही प्राइवेट तकनीकी संस्थानों में भी निवेश की योजना बनानी होगी क्योंकि आधुनिक तकनीक भारी निवेश की माँग करती है। निजी संस्थान सीमित फीस में इसके लिए सुविधाएँ नहीं दे पाएँगे। कॉर्पोरेट अपने सीएसआर फंड के साथ निजी संस्थानों के साथ मिलकर काम करें।...
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पृष्ठ क्र. 10
आभार, धन्यवाद या कृतज्ञता हमारे लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके द्वारा हम सीधे ईश्वर से जुड़ जाते हैं। रिश्तों से सुख प्राप्त करने के लिए कृतज्ञता अत्यन्त आवश्यक है। कृतघ्नता महापाप है। कृतघ्न व्यक्ति अपने रिश्तों को हर बात के लिए दोष देता है, उन पर आरोप लगाता है और उन्हें गालियाँ देकर उनसे झगड़ा करता है।
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पृष्ठ क्र. 12
ध्यान और अध्यात्म का अभ्यास मात्र एक बोझिल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अपने भीतर प्रेम और सौंदर्य को दोबारा खोजने का मार्ग है। कृतज्ञता के साथ इसका अभ्यास करना हमें अहसास दिलाता है कि हम मनुष्य के खूबसूरत रूप में इस धरती पर उपस्थित हैं।...
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पृष्ठ क्र. 44
पढ़ाई से अधिक बच्चे सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। यही प्लेटफॉर्म अगर बिना गाइडेंस के उपयोग किया जाए तो संकट, भ्रम और गलत जानकारी भी उतनी ही सरलता से फैलती है। इसलिए पैरेंट्स के लिए आवश्यक है कि वे बच्चों को डिजिटल अनुशासन सिखाएँ, अर्थात् इंटरनेट से डरना नहीं, बल्कि उसे समझदारी से उपयोग करना।...
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