अनुक्रमणिका

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श्री गुरुदेव की कृपा का फल


श्री गुरुदेव की कृपा का फल

वेद विज्ञान का अनावरण अपनी एक चेतना में करना अत्यन्त सरल है। अब अपनी इस बात के लिये जिम्मेवार नहीं हैं कि अभी तक बड़ा कठिन मानते हैं, समस्त चीजें असम्भव होती हैं रात्रि के अंधेरे में, किंतु रात्रि सदा नहीं रहती, दिन आता हैऔर जैसे ही पौ फटती है, जैसे प्रात: की अरुणिमा आई वो रात की कठिनाईयाँ, वो रात की समस्यायें किसी को याद भी नहीं होती।...

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शिक्षा में साकार हों सुधार के सभी सपने


शिक्षा में साकार हों सुधार के सभी सपने

वर्ष 1966 में कोठारी आयोग की रिपोर्ट ने देश की शिक्षा-प्रणाली में परिवर्तन का पहला व्यापक खाका खींचा था। वर्ष 1968 में इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के रूप में अपनाया गया। आयोग के सदस्य सचिव जे. पी. नायक इसके मुख्य वास्तुकार थे। 1979 में प्रकाशित उनकी किताब ?एजुकेशन कमीशन एंड आफ्टर? शिक्षा नीति के शुरुआती एक दशक के क्रियान्वयन का मूल्यांकन करती है।

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व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण है जागरूकता


व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण है जागरूकता

जब हम अहंकार और स्वार्थ में निर्णय लेते हैं, तो परिवार तथा समाज के हित की उपेक्षा हो जाती है। इसलिए अपनी सोच में किसी भी कारण से आए अहंकार और स्वार्थ के प्रति सजग रहना चाहिए। हमें अपनी निर्णय प्रक्रिया में परिवार-हित तथा लोककल्याण को महत्व देना चाहिए। कहा भी जाता है, 'कर भला तो हो भला' सबके भले में ही हमारा भला निहित है।

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मन के जगने से बदलेगा जीवन


मन के जगने से बदलेगा जीवन

जीवन में जागृति की प्रक्रिया दो प्रकार से आगे बढ़ती है। पहले हम अपने भीतर उस ?परम स्रोत? को खोजें, जो हमारा वास्तविक स्वरूप है। उसके बाद उस बोध को अपने दैनिक जीवन में सम्मिलित करें। इस प्रकार धीरे-धीरे हमारा जीवन उस शाश्वत स्थिरता से सराबोर होने लगेगा।

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पैरेंट्स की टेक गाइड: बच्चे को फोन देते समय ये फीचर्स ऑन करें


पैरेंट्स की टेक गाइड: बच्चे को फोन देते समय ये फीचर्स ऑन करें

परीक्षा की तैयारी में जुटे बच्चों की पुस्तकें तो खुली हैं, मगर दिमाग बंद ही है। तैयारी पूरी है, रिवीजन का ट्रैक भी शेड्यूल के अनुसार से सही है, मगर मुस्कान गायब है। यह तनाव के लक्षण हैं। बच्चों के माता-पिता अपने मित्रों और रिश्तेदारों से बस यही कहते रहते हैं कि इस बार उनका लाडला पूरे परिवार में अब तक के सबसे अधिक अंक लाएगा।...

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