अनुक्रमणिका
पृष्ठ क्र. 6
हजारों वर्षों से तुरीय चेतना या समाधि या भावातीत सत्ता अत्यन्त कठिन मानी गई और नाना प्रकार की युक्तियों के द्वारा कठिन मानी गयी। ये गुरुदेव का प्रताप था प्रत्यवायो न विद्यते, ये गुरुदेव का प्रताप था कि अभिक्रम सबके लिए सुगम हो गया। योग का अभिक्रम सबके लिए सुगम हो गया और जब लाखों-लाखों आदमी सारे विश्व में भावातीत होने लगे।...
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पृष्ठ क्र. 8
भारत में कोचिंग का व्यवसाय 58,000 करोड़ से अधिक का है। इसके बावजूद सफलता की दर बहुत कम है। कोचिंग संस्थान हर छात्र को एक ही तरीके से पढ़ाते हैं, बिना यह समझे कि हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। वे मात्र 'ऑब्जेक्टिव' )बहुविकल्पीय) प्रश्न हल करना सिखाते हैं, जबकि बोर्ड परीक्षाओं के लिए अलग प्रकार के कौशल की आवश्यकता होती है।...
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पृष्ठ क्र. 10
जब हम अपने कर्म ईश्वर को समर्पित करके और ईश्वर को साक्षी मानकर करते हैं, तो धीरे-धीरे हमारे कर्म स्वतः निष्काम होने लगते हैं। हमारा जीवन तभी सफल, सुफ़ल और सार्थक होगा, जब हम अपने आत्मकल्याण के लिए निष्काम प्रेम और कर्म को अपने जीवन में अपनाएँगे। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने अपनी पुस्तक ?कल्पलता? में लिखा है...
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पृष्ठ क्र. 12
वह दौर कठिन था, पर उसी ने मुझे मेरे वास्तविक स्वरूप से परिचित कराया- एक ऐसी इंसान जो अपूर्ण है, फिर भी साहसी है; जो डरती है, फिर भी प्रेम करना जानती है। तब मुझे समझ आया कि मैं किसी बाहरी शक्ति से नहीं, बल्कि अपने ही सच्चे स्वरूप से संघर्ष कर रही थी।...
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पृष्ठ क्र. 44
आज कई अभिभावक बच्चों का पूरे जीवन को संभालने लग जाते हैं, जैसे- कब पढ़ना है, कब खेलना है, किससे मित्रता करनी है। जब प्रत्येक निर्णय आप लेंगे, तो बच्चा स्वयं पर विश्वास करना कैसे सीखेगा? जब उसने स्वयं कभी कुछ किया ही नहीं, तो वह जीवन के मोड़ पर स्वयं को सबसे कमजोर और असहाय समझेगा।...
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