अनुक्रमणिका

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श्री गुरुदेव की कृपा का फल


श्री गुरुदेव की कृपा का फल

आज के वातावरण में शिक्षा जगत चेतना की शिक्षा से अनभिज्ञ है। बाल मंदिर से लेकर विद्यावारिधि या विद्यावाचस्पति तक के पाठ्यक्रमों में कहीं भी चेतना की शिक्षा का समावेश नहीं है। महर्षि जी ने समस्त विश्व में बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की और चेतना पर आधारित?आत्मा पर आधारित?शिक्षा को वर्तमान शिक्षा की मुख्य धारा में सम्मिलित किया।

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परतंत्रता की मानसिकता से मुक्ति


परतंत्रता की मानसिकता से मुक्ति

अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर शिक्षा, चिकित्सा, शोध, विज्ञान, अनुसंधान तथा सुशासन एवं विकास के आदर्श प्रतिमान गढ़ेगा, परंतु दुर्भाग्य से सत्ता का हस्तांतरण तो हुआ, पर सत्ता-व्यवस्था का चरित्र एवं स्वरूप नहीं बदला। भारत 1947 में स्वाधीन अवश्य हुआ, पर स्व पर आधारित तंत्र, मंत्र एवं मानस आज तक निर्मित तथा विकसित नहीं कर सका।...

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500 ऋण लेकर प्रारंभ की थी डोमिनोज


500 ऋण लेकर प्रारंभ की थी डोमिनोज

1960 में अमेरिका के मिशिगन राज्य के यप्सिलैंटी क्षेत्र में दो भाइयों?टॉम और जेम्स मोनाघन?ने 500 डॉलर उधार लेकर एक पिज़्ज़ेरिया खरीदा। उसका नाम रखा गया डोमिनिक्स। दरअसल, टॉम अनाथालय में पले थे। उनके पास घर खर्च और कॉलेज की फीस के लिए भी पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने इसे पार्ट-टाइम काम के रूप में प्रारंभ किया, ताकि वे रात में काम कर सकें और दिन में पढ़ाई कर सकें।

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अपने पुराने स्वयं से पुन: मिलना


अपने पुराने स्वयं से पुन: मिलना

एक दिन अचानक मुझे अपने बचपन से जुड़ी एक तस्वीर मिल गई। वह एक पुरानी एल्बम में लगी एक फोटो के पीछे रखी हुई थी, किंतु मेरा ध्यान कभी उस पर नहीं गया। उस तस्वीर में सफेद सतह पर छोटे-छोटे फूलों और दिल की आकृतियाँ बनी हुई थीं। इसके साथ ही छोटी-छोटी लड़कियों की छवि भी थी।...

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एक आवश्यक जीवन-कौशल


एक आवश्यक जीवन-कौशल

किशोरावस्था वह आयु होती है, जब किशोर अपनी सोच, दृष्टिकोण और व्यक्तित्व को आकार देते हैं। इस समय सांस्कृतिक विविधताओं को समझना एक आवश्यक जीवन-कौशल बन जाए, तो बेहतर है। नए लोगों से मिलते समय उनकी संस्कृति और परंपराओं के प्रति जिज्ञासु होना तथा उन्हें जानना न केवल आपको अधिक समझदार बनाएगा, बल्कि आपको अधिक संवेदनशील और सहिष्णु भी बनाएगा।

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