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विशेष: ज्ञानयुग दिवस

  वैसे तो वर्तमान में ध्यान की अनेक विधियाँ प्रचलित हैं, किन्तु युग प्रवर्तक महर्षि महेश योगी ने ध्यान की जिस प्रविधि का भारत तथा विश्व के अनेक देशों में प्रचार-प्रसार किया वह है ?भावातीत ध्यान?। ध्यान की यह तकनीक सरल,सहज और वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमाणित है। मनुष्य यदि नियमित रूप से प्रात: एवं सायं काल में भावातीत ध्यान करे तो वह स्वयं को तनावों, दु:खों, हताशा, चिन्ता, अवसाद और संत्रास से बचा सकता है और स्वयं को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतम बनाने की दिशा में ले जाने का प्रयत्न कर सकता है। भावातीत ध्यान महर्षि योगी द्वारा स्थापित किसी भी महर्षि ध्यान योग केन्द्र में जाकर सीखा जा सकता है।

  ध्यान पर वैसे तो अनेक ग्रंथ भी लिखे गए हैं पर आवश्यकता इस बात की है कि ध्यान को करके देखो और होने वाले परिवर्तनों को अनुभव करो। प्राय: हम भगवान से प्रार्थना करके यह समझते हैं कि हमने भगवान को प्रसन्न कर लिया है किन्तु वास्तविकता यह है कि प्रार्थना में हम आर्त भाव से भगवान के समक्ष अपने मन की बात कहते हैं पर भगवान हमसे जो कहना चाहते हैं वह हम ध्यान में ही सुन पाते हैं। ध्यान करतेकरते हम दैहिक चेतना अर्थात ?स्व? अथवा आत्मकेंद्रित व्यक्तित्व से ऊपर उठकर आत्मिक चेतना अर्थात ?पर? अथवा उदार व्यक्तित्व के बन जाते हैं जिससे आत्मकल्याण तो होता ही है साथ ही समाज, राष्ट और विश्व का भी कल्याण होता है।


।।जय गुरूदेव, जय महर्षि।।


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